जीना सिखाती है रामकथा

लेखकीय 

भारतीय संस्कृति के चार ग्रंथ बड़े अद्भुत हैं—महाभारत रहना सिखाती है, गीता करना सिखाती है, भागवत मरना सिखाती है और श्रीराम कथा जीना सिखाती है। रहने और जीने में बड़ा फर्क है। रहते तो पशु भी हैं, पर जीने की संभावना सिर्फ मनुष्य में होती है। श्रीराम कथा के सभी पात्र जीवन का अद्भुत संदेश देते हैं। विशेष तौर पर जब हम गोस्वामी तुलसीदासजी का श्रीरामचरितमानस पढ़ते हैं तो श्रीराम का अद्भुत स्वरूप सामने निकलकर आता है। वाल्मीकिजी ने रामायण लिखी और तुलसीजी ने मानस। वाल्मीकिजी के श्रीराम श्रेष्ठ मनुष्य थे, लेकिन तुलसीदासजी ने श्रीराम को भक्तों का भरोसा बनाया। सबसे बड़ा काम यह हुआ कि तुलसीदासजी ने हमें परिवार के श्रीराम सौंपे। इसी के साथ हमारे हनुमान दिए।

इस पुस्तक में श्रीरामकथा को इसी शैली में प्रस्तुत किया गया है। मुझे तो लगता है, किसी के भी जीवन में कोई भी समस्या हो, निदान इस पुस्तक के हर पृष्ठ पर मिल जाएगा। भरोसे के साथ इस पुस्तक को खोलिए और पढिए। 

22 अप्रैल, 2016 हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा संवत् 2073 उज्जैन —पं. विजयशंकर मेहता, जीवन प्रबंधन गुरु 

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